पटना न्यूज डेस्क: आम धारणा के विपरीत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भी सरकार के नेतृत्व में पूरी सक्रियता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है और संभावना है कि वे 10 अप्रैल के आसपास राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। इन दिनों वे कोसी-सीमांचल क्षेत्र के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं, जहां वे अपनी सरकार के पिछले दो दशकों के कामकाज और उपलब्धियों को जनता के सामने रख रहे हैं।
अपने दौरे के दौरान नीतीश कुमार अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद पर भी निशाना साधना नहीं भूल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद ने अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया और परिवारवाद की राजनीति को आगे बढ़ाया। इस बीच उनके बेटे निशांत कुमार ने भी हाल ही में जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता ले ली है और उन्हें नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाएं तेज हैं।
इधर बिहार को नया राज्यपाल भी मिल गया है। सेवानिवृत्त सेना अधिकारी सैयद अता हसनैन को राज्य का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उन्होंने अरिफ मोहम्मद खान की जगह ली है, जो लगभग एक वर्ष दो महीने तक इस पद पर रहे। हसनैन शपथ ग्रहण समारोह के लिए पटना पहुंच चुके हैं और 14 मार्च को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। भारतीय सेना में करीब चार दशक तक सेवा देने वाले हसनैन की नियुक्ति के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज हो गई है, खासकर सीमांचल क्षेत्र में प्रस्तावित सेना बेस और अवैध घुसपैठ के मुद्दे को लेकर।
वहीं कांग्रेस के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। पार्टी के कुछ बागी नेता 17 मार्च को पटना स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम के सामने प्रदर्शन करेंगे। इसी दिन “सेव बिहार कांग्रेस महासम्मेलन” आयोजित करने की भी घोषणा की गई है। पूर्व एआईसीसी सदस्य आनंद माधव ने आरोप लगाया कि बिहार कांग्रेस भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है, जिसके कारण पार्टी का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित एजेंट और दलाल पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं और वे कांग्रेस को बिहार में गिरवी नहीं रखने देंगे। गौरतलब है कि आनंद माधव और उनके छह साथियों को पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया जा चुका है।