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पटना में बढ़ते प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, वायु और ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश

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Posted On:Friday, March 13, 2026

पटना न्यूज डेस्क: राजधानी पटना में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंता जताते हुए पटना हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि शहर में वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है और मौजूदा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। इसलिए प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एक ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

यह निर्देश सुरेंद्र प्रसाद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। न्यायमूर्ति राजीव राय की एकल पीठ ने विभिन्न थानों से दाखिल रिपोर्टों की समीक्षा करते हुए निगरानी और कार्रवाई में गंभीर खामियों पर नाराजगी जताई। अदालत ने पाया कि गांधी मैदान, पीरबहोर और कदमकुआं थानों के अधिकारियों की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं था कि तेज आवाज में डीजे बजाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

अदालत ने यह भी कहा कि रूपसपुर और बुद्धा कॉलोनी थानों के स्टेशन हाउस ऑफिसरों ने पहले दिए गए निर्देश के बावजूद अपनी रिपोर्ट दाखिल ही नहीं की। इस पर अदालत ने गांधी मैदान, पीरबहोर और कदमकुआं थानों को 15 नवंबर से 13 मार्च 2026 के बीच ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदमों की नई और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। वहीं रूपसपुर और बुद्धा कॉलोनी थानों के अधिकारियों को 10 अप्रैल को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मसौढ़ी के एसडीएम और पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों पर की गई कार्रवाई की सराहना भी की। सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने बताया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए 0612-4575621 हेल्पलाइन शुरू की गई है और मैरिज हॉल व कार्यक्रम स्थलों को Bihar Loudspeaker Act, 1955 के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश सिंह ने अदालत को बताया कि फिलहाल शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का डेटा केवल तीन स्थानों—दानापुर, प्लैनेटेरियम और पाटलिपुत्र—से ही एकत्र किया जा रहा है। इस पर अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु और ध्वनि प्रदूषण के नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने का निर्देश दिया और कहा कि यह कार्रवाई सरकारी संस्थाओं और निजी व्यक्तियों दोनों पर समान रूप से लागू होगी।

अदालत ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के उन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा, जिनमें सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा, सूखे पत्ते और कागज जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव नीरज नारायण भी मौजूद थे। उन्हें अधिकारियों और वकीलों के साथ बैठक कर पटना में प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है, जिसे अगली सुनवाई में पेश किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस योजना का उद्देश्य पटना को प्रदूषण नियंत्रण के मामले में एक आदर्श शहर बनाना होना चाहिए।


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