पटना न्यूज डेस्क: बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा के दौरान एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया। मसौढ़ी के खरजमा गांव की एक छात्रा परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से महज 10 मिनट देर से पहुंची। सुबह 9 बजे गेट बंद हो चुका था और 9:10 बजे पहुंचने के बावजूद उसे प्रवेश नहीं मिला। काफी अनुरोध के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो वह निराश होकर लौट गई।
जानकारी के अनुसार छात्रा की परीक्षा बरनी स्थित केंद्र पर थी। वह एक दिन पहले महाराजचक में रिश्तेदार के यहां ठहरी थी, जहां से परीक्षा केंद्र की दूरी करीब छह किलोमीटर थी। प्रवेश नहीं मिलने के बाद वह नदौल पहुंची और वहां से ट्रेन में सवार हो गई। तरेगना और मसौढ़ी कोर्ट स्टेशन के बीच चलती ट्रेन से कूदने की घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गई। अस्पताल ले जाने पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
यह हादसा न सिर्फ परीक्षा व्यवस्था, बल्कि छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को भी सवालों के घेरे में खड़ा करता है। इस वर्ष बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 15.12 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। पहली पाली में लगभग 7.58 लाख और दूसरी पाली में करीब 7.54 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। पूरे प्रदेश में 1699 केंद्र बनाए गए हैं। राजधानी पटना में 70 परीक्षा केंद्र संचालित हैं, जहां चार मॉडल केंद्रों पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
बोर्ड ने सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए जूता-मोजा पहनकर आने पर रोक लगाई है, ताकि सुरक्षा जांच में आसानी हो। पहले दिन कई जिलों में देर से पहुंचे छात्रों ने दीवार फांदकर प्रवेश की कोशिश की। पटना के मिलर स्कूल सहित बक्सर, बेगूसराय, गोपालगंज और मुंगेर में भी ऐसे मामले सामने आए, जहां सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को बाहर कर दिया।
इस दुखद घटना के बीच यह याद रखना जरूरी है कि किसी भी समस्या का समाधान आत्महत्या नहीं हो सकता। परीक्षा में देरी, असफलता या दबाव जीवन से बड़ा नहीं है। अपने मन की बात परिवार, मित्रों या शिक्षकों से साझा करें। जरूरत पड़े तो काउंसलिंग और हेल्पलाइन की सहायता लें। एक परीक्षा पूरी जिंदगी तय नहीं करती—हिम्मत और संवाद ही हर कठिन परिस्थिति से निकलने का रास्ता है।