पटना न्यूज डेस्क: पटना नगर निगम के नए फैसले के बाद राजधानी में घर या दुकान रखना अब पहले से ज्यादा महंगा साबित हो सकता है। शहर की सड़कों के पुनर्वर्गीकरण के साथ ही होल्डिंग टैक्स की दरों में इजाफा तय माना जा रहा है। इसका असर सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन की कीमतों, खरीद-बिक्री और किराए पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
नगर निगम ने शहर की 112 सड़कों की नई सूची तैयार की है, जिसे नगर विकास एवं आवास विभाग की मंजूरी मिल चुकी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब पटना की 43 सड़कों को ‘प्रधान मुख्य सड़क’ का दर्जा दिया गया है, जबकि पहले इनकी संख्या 24 थी। वहीं, 69 सड़कों को ‘मुख्य सड़क’ की श्रेणी में रखा गया है। सड़कों की चौड़ाई और कनेक्टिविटी को आधार बनाकर यह अपग्रेडेशन किया गया है।
सड़कों की श्रेणी बदलने का सीधा असर होल्डिंग टैक्स पर पड़ेगा। जिन इलाकों की सड़कें अब ऊंची श्रेणी में आ गई हैं, वहां आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर टैक्स पहले की तुलना में लगभग डेढ़ गुना तक बढ़ सकता है। कंकड़बाग, किदवईपुरी और अशोक राजपथ जैसे व्यस्त इलाकों की सड़कों को उच्च श्रेणी में शामिल किए जाने से इन क्षेत्रों में रहने या कारोबार करने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
नए नियमों के अनुसार, 40 फुट से अधिक चौड़ी सड़कें ‘प्रधान मुख्य सड़क’, 20 से 40 फुट चौड़ी सड़कें ‘मुख्य सड़क’ और 20 फुट से कम चौड़ी सड़कें अन्य श्रेणी में रहेंगी। यह वर्गीकरण हर पांच साल में समीक्षा के अधीन होगा और बिहार नगरपालिका संपत्ति कर निर्धारण नियमावली, 2013 के तहत लागू किया गया है। जानकारों का कहना है कि इससे नगर निगम के राजस्व में तो इजाफा होगा, लेकिन आम लोगों की जेब पर इसका असर साफ दिखाई देगा।