पटना न्यूज डेस्क: पटना हाई कोर्ट ने बिहार में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और सड़कों पर लावारिस हालत में मिल रहे मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए संस्थागत सहयोग के अभाव पर गंभीर संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मुद्दे पर जवाब दाखिल करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश दिया। यह सुनवाई उस जनहित याचिका पर हो रही थी, जिसे अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू किया। याचिका की आधार रिपोर्ट बिहार लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (BALSA) ने 17 फरवरी को तैयार कर सौंपी थी।
रिपोर्ट 14 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के बिहार मानसिक स्वास्थ्य एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (BIMHAS), कोइलवर, भोजपुर जिले के दौरे के बाद तैयार की गई थी। यह राज्य का एकमात्र सरकारी मानसिक स्वास्थ्य एवं शोध संस्थान है। अदालत ने टिप्पणी की कि बिहार की विशाल आबादी और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए BIMHAS की क्षेत्रीय शाखाएं स्थापित करना जरूरी है। साथ ही प्रत्येक सरकारी अस्पताल में बेघर मानसिक रोगियों के लिए अलग वार्ड और आश्रय सुविधा की अनुपस्थिति को भी गंभीर चिंता का विषय बताया।
अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, पुलिस महानिदेशक, कारा महानिरीक्षक, राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और BIMHAS के निदेशक को 16 मार्च को अगली सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।